सिटी हेराल्‍ड, ब्रेकिंग न्‍यूज: जिस मामले में एआईआर संजीव श्रीवास्‍तव व राजा सैफी को हुई सजा, उसमें तत्‍कालीन आरआई संजय दीक्षित और राजस्‍व विभाग के हरिओम उपाध्‍याय की जमानत याचिका कोर्ट ने की खारिज

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City Herald, Breaking News: In the case in which AIR Sanjeev Shrivastava and Raja Saifi were sentenced, the court rejected the bail plea of ​​the then RI Sanjay Dixit and Hariom Upadhyay of the Revenue Department

– नगरपालिका सीएमओ की आपत्ति के बाद खारिज हुई जमानत याचिका
सिटी हेराल्‍ड, इटारसी। सराफा व्यवसायी शंकर रसाल ने अपनी पत्‍नी शुभांगी रसाल के नाम से न्यास कॉलोनी में एक प्लॉट 81 ए (PLOT 81 A) इटारसी नगरपालिका से खरीदा था। इसकी रजिस्ट्री 20 मार्च 2018 को हुई थी। यह प्‍लाट फर्जी निकला। जिसके बाद रसाल परिवार ने कोर्ट ने मामला दायर किया था। इस मामले में आज दोबारा बडी अपडेट आई है। मामले में आरोपी बने तत्‍कालीन आईआर संजय दीक्षित और राजस्‍व विभाग के हरिओम उपाध्‍याय की जमानत याचिका कोर्ट ने कैंसिल कर दी। प्रथम अपर सत्र न्‍यायाधीश श्री हर्ष भदौरिया की न्‍यायालय ने नगरपालिका सीएमओ की आपत्ति के बाद दोनों की जमानत याचिका खारिज की है। आज इस मामले की पैरवी शासकीय अधिवक्‍ता सत्‍यनारायण चौधरी और नगरपालिका की ओर से अधिवक्‍ता सीके पटेल व प्रशांत चौरे ने की। 

आपको बता दें कि कुछ दिनों पूर्व इन्‍हें हिरासत में लेकर जेल भेजा गया था। इन्‍होंने अपने कृत्‍य और हस्‍ताक्षर को फर्जी बताया था, जिसके बाद हेंडराइटिंग एक्‍सपर्ट की मदद ली गई थी। जिसमें दोनों ही हेंडराइटिंग का मिलान हुआ। इसके बाद दोनों को हिरासत में लिया गया था।
उल्‍लेखनीय है कि इसी मामले में तत्‍कालीन सीएमओ अक्षत बुंदेला और उप रजिस्‍ट्रार रहे आनंद पांडेय के विरुद्ध गिरफतारी वारंट कोर्ट ने जारी कर रखा है।
एक दिन पूर्व ही दो आरोपियों संजीव श्रीवास्‍तव और सर्विस प्रोवाइडर राजा सैफी को 7-7 साल की सजा दी है और 50-50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। धारा 467 के तहत 7 साल की सजा और 50-50 हजार रुपये जुर्माना और धारा 420, 471, 120 बी और 469 के तहत 5-5 साल की सजा और 50-50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। आपको बता देंं कि प्रत्‍येक धारा में 50 हजार रुपये का जुर्माना है। इस तरह दोनों अपराधियों पर ढाई -ढाई लाख रुपये का जुर्माना हुआ है। आपको बता दें कि शनिवार को ही कोर्ट के आदेश से जेल भेज दिया गया था।

उल्‍लेखनिय है कि इटारसी नगरपालिका परिषद के वर्ष 2015 से 2019 के कार्यकाल में न्यास कॉलोनी में एक सार्वजनिक प्रयोजन की जमीन को प्लॉट बनाकर फर्जी रसीदों और रजिस्ट्री के सहारे बेचने के मामले में कोर्ट ने अपना निर्णय सुना दिया है। यह शासकीय भूमि प्लॉट बताकर सराफा व्यवसायी को वर्ष 2018 में नगरपालिका के एक सहायक राजस्व निरीक्षक ने सर्विस प्रोवाइडर के परिजन के सहयोग से बेची थी। मामला कोर्ट में जाने के बाद पुलिस थाने में प्रकरण भी दर्ज हुए थे। कोर्ट ने सोमवार को दिए निर्णय में एआरआई संजीव श्रीवास्तव(ARI SANJEEV SHRIVASTAV), सर्विस प्रोवाइडर के परिजन राजा सैफी(RAJA SAIFEE) को दोषी माना है।

 

वर्ष 2018 में हुई थी रजिस्ट्री
सराफा व्यवसायी शंकर रसाल ने अपनी पत्‍नी शुभांगी रसाल के नाम से न्यास कॉलोनी में एक प्लॉट 81 ए (PLOT 81 A) इटारसी नगरपालिका से खरीदा था। इसकी रजिस्ट्री 20 मार्च 2018 को हुई थी। इसके लिए रसाल परिवार ने रजिस्ट्री मिलाकर कुल 12 लाख रुपए का भुगतान किया था। इससे पहले की प्रक्रिया के तहत नगरपालिका के तत्कालीन सहायक राजस्व निरीक्षक संजीव श्रीवास्तव ने शुभांगी रसाल के नाम से 1083और 1091 रसीदें देकर 1.50लाख-1.50 लाख रुपए जमा कराए थे। इसके बाद उन्हें प्राधिकार पत्र और बाद में अधिपत्य पत्र राजा सैफी के माध्यम से बनवाकर दिए गए थे। कुछ माह बाद जब उन रसीदों के फर्जी होने की जानकारी सामने आई थी तो प्लॉट क्रेता ने इसकी शिकायत पुलिस थाने में की थी। पुलिस ने वर्ष 2019 में इस मामले में तत्कालीन आरआई संजीव श्रीवास्तव, राजा सैफी पर प्रकरण दर्ज किया था और अन्य लोगों के खिलाफ विवेचना जारी थी।

यह तथ्य सामने आए
मामले में जब जांच हुई तो कोर्ट के समक्ष यह तथ्य आए कि जो प्राधिकार पत्र प्लॉट क्रेता को दिया गया था उसकी नगरपालिका कार्यालय के आवक-जावक रजिस्टर और रजिस्ट्रार कार्यालय के रजिस्टर में कोई एंट्री नहीं थी। इसी तरह अधिपत्य पत्रक की आवक-जावक में कोई एंट्री नहीं थी। इस प्लॉट विक्रय से जुड़ी नोटशीट का भी कोई उल्लेख कोर्ट के सामने नहीं आया। कुल मिलाकर अपने पदों का दुरुपयोग करते हुए इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया गया था। पूरे मामले में सुनवाई और तथ्यों के आधार पर कोर्ट ने तत्कालीन एआरआई संजीव श्रीवास्तव और राजा सैफी को इस मामले में दोषी माना है और आदेश सुरक्षित रख लिया है। दंड के प्रश्न पर आरोपीगणों/अधिवक्ताओं को सुनने के बाद 15 जनवरी 2025 को दंडादेश जारी किया जाएगा। वहीं तत्कालीन सीएमओ अक्षत बुंदेला और तत्कालीन उप पंजीयक आनंद पांडे की भी संलिप्तता कोर्ट ने इस पूरे फर्जीवाड़े में पाई है। कोर्ट ने 319(2 ) शक्तियों का प्रयोग करते हुए दोनों अधिकारियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। कोर्ट के आदेश के बाद सिटी पुलिस ने दोषी पाए गए दोनों लोगों को अभिरक्षा में लेकर उन्हें नर्मदापुरम जेल दाखिल करा दिया है।

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